Baghdad Main Har Samt Hai Taiba Ka Nazara | Baghdad Hai Pyara
बग़दाद में हर सिम्त है तयबा का नज़ारा बग़दाद में हर सम्त है तयबा का नज़ारा बग़दाद है प्यारा, बग़दाद […]
बग़दाद में हर सिम्त है तयबा का नज़ारा बग़दाद में हर सम्त है तयबा का नज़ारा बग़दाद है प्यारा, बग़दाद […]
आस्ताँँ है ये किस शाहे-ज़ीशान का, मरहबा मरहबा अल्लाह रे क्या बारगाहे-ग़ौषे-जली है गर्दन को झुकाए हुए एक एक वली
ज़माने में अगर देखी तो शाने-क़ादरी देखी मैं क़ादरी, क़ादरी, क़ादरी हूँ क़ादरी क़ादरी, क़ादरी, क़ादरी हूँ क़ादरी क़ादरी फ़क़ीर,
हमारी है दुआ, शहे-ग़ौषुल-वरा ! मिले ये नौकरी, करूँ मैं चाकरी तमन्ना है मेरी, यही मेरी लगन हमारी है दुआ,
ज़िक्र है आज उस शाहे-जीलान का, मरहबा मरहबा मीराँ ! मीराँ ! मीराँ ! मीराँ हमारी है दुआ, शहे-ग़ौषुल-वरा हरा
वाह क्या मर्तबा ए ग़ौष है बाला तेरा With Tazmeen चप्पे चप्पे पे है आफ़ाक़ के शोहरा तारा चर्ख़े-अफ़लाके-विलायत में
ग़ौष का करम, ग़ौष की अता, ग्यारहवीं शरीफ़ ग़ौष का करम, ग़ौष की अता ग्यारहवीं शरीफ़, ग्यारहवीं शरीफ़ आशिक़ों का
वाह ! क्या मर्तबा ए ग़ौष है बाला तेरा वाह ! क्या मर्तबा ए ग़ौष है बाला तेरा ऊँचे ऊँचों
अपने दामाने-शफ़ाअत में छुपाए रखना अपने दामाने-शफ़ाअत में छुपाए रखना मेरे सरकार मेरी बात बनाए रखना आप याद आएँ तो
अल-मदद, पीराने-पीर ! ग़ौषे-आज़म दस्तगीर रुत्बा ये विलायत में क्या ग़ौष ने पाया है अल्लाह ने वलियों का सरदार बनाया