Woh Shaher e Muhabbat Jahan Mustafa Hain

Voh Shaher e Muhabbat Jahan Mustafa Hain

वो शहरे-मोहब्बत, जहाँ मुस्तफ़ा हैं वो शहरे-मोहब्बत, जहाँ मुस्तफ़ा हैं वहीं घर बनाने को जी चाहता है वो सोने से कंकर, वो चाँदी सी मट्टी नज़र में बसाने को जी चाहता है जो पूछा नबी ने, के कुछ घर भी छोड़ा तो सिद्दीक़ अकबर के होंठों पे आया वहाँ मालो-दौलत की क्या है हक़ीक़त जहाँ … Read more