Wo Kamal e Husn e Huzoor Hai Lyrics With Tazmeen
ऐ क़लम ! ज़रा तू सँम्भल के चल, ये मक़ामे-वहमो-गुमाँ नहीं ऐ क़लम ! ज़रा तू सँम्भल के चल, ये मक़ामे-वहमो-गुमाँ नहीं है नबी के हस्न का तज़्किरा, किसी और का ये बयाँ नहीं करे उन की मदह का हक़ अदा, ये किसी में ताबो-तवाँ नहीं वो कमाले-हुस्ने-हुज़ूर है के गुमाने-नक़्स जहाँ नहीं यही फूल … Read more